ये है स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाने का असली कारण

 

साक़िब सलीम

भारत यानि इंडिया कल 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस / इंडिपेंडेंस डे /यौमे आज़ादी मनाएगा। 15 अगस्त ही के दिन 1947 को अंग्रेज़ सरकार ने 90 साल भारत पर शासन करने के बाद देश की बागडोर देशवासियों को वापिस सौंप दी थी। इसका हर्जाना भारत ने दो और फिर तीन (बांग्लादेश) टुकड़े हो कर चुकाया। पर हम में से कितने लोग ये जानते हैं कि ये 15 अगस्त की तारीख़ आख़िर क्यों चुनी गयी। क़ायदे से या तो 26 जनवरी चुना जाता जिस दिन पिछले 17 साल से कांग्रेसी तिरंगा फहराते थे या 30 दिसंबर जब सुभाष चंद्र बोस ने अंडमान पर झंडा फहराया था या 14 अप्रैल जब शौकत मालिक ने भारतीय तिरंगा अंग्रेज़ फ़ौज को हरा कर मोइरांग पर फहराया था। लेकिन 15 अगस्त क्यों ?

लार्ड मॉउन्टबेटन सिंगापुर में एशिया के सेनाध्यक्ष के रूप में जापानी आत्मसमर्पण को स्वीकार करते हुए

असल में 15 अगस्त पूरे तौर पर भारत के आख़िरी वाइसराय लॉर्ड मॉउन्टबेटन के स्वार्थ के लिए चुना गया था। ये तारीख़ उसके जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण थी क्योंकि वही उस सेना का अध्यक्ष था जिसके सामने जापान ने दो परमाणु बम गिराए जाने के बाद आत्मसमर्पण किया था। मॉउन्टबेटन की मंशा थी कि वो ये ज़ाहिर कर सके कि असली मालिक कौन है।

मॉउन्टबेटन ख़ुद एक साक्षात्कार में कहते हैं कि –
“ये तारीख़ अचानक से मेरे दिमाग़ में आयी। ये एक सवाल का जवाब देते हुए मैंने सोचा था। मैं ये दिखाने पर आमादा था कि सबको ये समझ आये कि इस पूरे प्रकरण (आज़ादी मिलना) का असली सरदार/मुखिया कौन है। फिर मैंने अगस्त सोचा, 15 अगस्त। क्यों ? क्योंकि ये जापान के आत्मसमर्पण की दूसरी सालगिरह थी।”

अलग अलग जगह मॉउन्टबेटन ने कई बार ये दोहराया है कि जापान का आत्मसमर्पण और भारत की आज़ादी उसके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षण थे।

(लेखक एक वरिष्ठ इतिहासकार हैं )


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Saquib Salim

Saquib Salim is a well known historian under whose supervision various museums (Red Fort, National Library, IFFI, Jallianwala Bagh etc.) were researched. To his credit Mr. Salim has more than 400 published articles on history, politics, culture and literature in English and Hindi. Before pursuing his research and masters in modern Indian History from JNU, he was an electrical engineering student at AMU. Presently, he works as a freelance/ independent history researcher, writer and manages the website heritagetimes.in

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