सुभाष-स्मृति : ‘नेताजी रिसर्च ब्यूरो’ और शिशिर बोस


Shubhneet Kaushik

कल जब हम नेताजी सुभाषचंद्र बोस को उनकी जयंती पर याद करें, तो हमें शिशिर कुमार बोस और उनके द्वारा स्थापित ‘नेताजी रिसर्च ब्यूरो’ के योगदान का भी स्मरण करना चाहिए। सुभाषचंद्र बोस के जीवन, उनकी राजनीतिक गतिविधियों, उनके चिंतन और लेखन से जुड़े महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों को इकट्ठा करने, उन्हें संपादित व प्रकाशित करने में शिशिर बोस ने अपना जीवन लगा दिया। नेताजी के भतीजे और शरत चंद्र बोस के बेटे शिशिर बोस (1920-2000) ने कभी अपने कामों का ढिंढोरा नहीं पीटा और न ही सरकारी उपेक्षा का रोना रोया। बल्कि अपना कर्तव्य समझकर लगन के साथ वे इस काम को आजीवन करते रहे।

प्रतिबद्धता किसे कहते हैं, यह जानना हो तो शिशिर बोस और ‘नेताजी रिसर्च ब्यूरो’ के काम को एकबार देखना चाहिए। वर्षों तक लगे रहकर शिशिर बोस ने जो काम किया, वह उनकी अटूट प्रतिबद्धता की बानगी देता है।

1957 में शिशिर बोस ने भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन के ऐतिहासिक अध्ययन और नेताजी और आज़ाद हिन्द फ़ौज से जुड़े महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों को सहेजने-सँजोने की दृष्टि से ‘नेताजी रिसर्च ब्यूरो’ की स्थापना की। नेताजी के पैतृक आवास में स्थापित रिसर्च ब्यूरो से ही ‘नेताजी कलेक्टेड वर्क्स’ के प्रकाशन की भूमिका तैयार हुई। बता दें कि 1969 में महात्मा गाँधी की जन्मशती में भाग लेने के लिए जब खान अब्दुल गफ़्फ़ार खान भारत आए, तो दिसंबर 1969 में वे ‘नेताजी रिसर्च ब्यूरो’ भी गए और वहाँ उन्होंने एक यादगार भाषण भी दिया।

उल्लेखनीय है कि आज़ादी के बाद नेताजी की आत्मकथा, उनके लेखों व भाषणों के प्रकाशन का पहला प्रयास आज़ाद हिन्द फौज के अधिकारियों ने किया था। इनमें प्रमुख रूप से शाहनवाज़ खान, शार्दूल सिंह कवीशर, लक्ष्मी सहगल, महबूब अहमद, धनराज शर्मा, बीरेन्द्र नाथ दत्त, बेला मित्रा और कल्याण कुमार बोस शामिल थे। इस उद्देश्य से इन लोगों ने ‘नेताजी पब्लिशिंग सोसाइटी’ की भी स्थापना की थी। सोसाइटी द्वारा 1948 में ही नेताजी की आत्मकथा का ‘एन इंडियन पिलग्रिम’ और ‘द इंडियन स्ट्रगल’ शीर्षक से दो भागों में प्रकाशन किया गया।

शिशिर बोस द्वारा संपादित ‘नेताजी कलेक्टेड वर्क्स’ के बारह खंड हैं। अँग्रेजी में यह संकलन नेताजी रिसर्च ब्यूरो, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस व परमानेंट ब्लैक द्वारा प्रकाशित किया गया है। जोकि हिन्दी में “नेताजी संपूर्ण वांग्मय” शीर्षक से 9 खंडों में उपलब्ध है। हिन्दी में यह प्रकाशन विभाग द्वारा 1999 में छापा गया है। बता दें कि नेताजी संपूर्ण वांग्मय के सातवें खंड में सुभाष बाबू के वे खत शामिल हैं, जो उन्होंने 1934-1942 के दौरान अपनी पत्नी एमिली शेंकल को लिखे थे।

इसके साथ ही शिशिर बोस ने नेताजी और शरत चंद्र बोस से जुड़े अपने संस्मरणों को अपनी किताब “सुभाष एंड शरत : एन इंटीमेट मेमायर ऑफ द बोस ब्रदर्स’ में दर्ज किया है। उनकी अन्य किताबें हैं : ‘द ग्रेट एस्केप’; ‘शरत चंद्र बोस रिमेम्बरिंग माय फादर’। शिशिर बोस सरीखे लोगों के लिए ही बाबा नागार्जुन ने ये पंक्तियाँ लिखी होंगी :

जिनकी सेवाएँ अतुलनीय
पर विज्ञापन से रहे दूर
उनको प्रणाम!


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