भारत का सबसे पहला सरकारी यूनानी मेडिकल कॉलेज, क्या आप इसे जानते हैं?

पटना का तिब्बी कॉलेज भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे पहला सरकारी यूनानी मेडिकल कॉलेज है. 29 जुलाई 1926 को गवर्मेंट तिब्बी कॉलेज एंड हॉस्पिटल की स्थापना हुई थी. पिछले नौ दशक से अपनी सेवा दे रहा ये कॉलेज 1934 से क़दमकुआं, बुद्ध मुर्ती पटना के पास मौजुद है.

इस कॉलेज के इतिहास की बात करें तो पटना में इसकी अपनी कोई इमारत नहीं थी. अपने स्थापना के समय से भिखना पहाड़ी में मरहूम शाह हमीदउद्दीन के घर 65 रुपये प्रति माह के किराए पर तक़रीबन आठ साल तक चला. रमना रोड, अंटाघाट से होते हुए ये जनवरी 1934 के ज़लज़ले के बाद आख़िरकार क़दमकुंआ में स्थापित हुआ, जहां ये आज भी मौजुद है. 1942 तक इसे तिब्बी स्कूल के नाम से जाना गया, 1943 में इस स्कूल ने तिब्बी कॉलेज का रुप लिया.

पटना ज़िला के डाक पालीगंज के ग़ौसगंज गांव के रहने वाले अहमद रज़ा क़ुरैशी पहले छात्र हैं, जिन्होंने इस स्कुल (तिब्बी कालेज) में दाख़िला लिया था.

1937 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फ़रोग़ के लिए जब डॉ. ज़ाकिर हुसैन पटना आए थे तब वो विशिष्ट अतिथी के तौर पर इस कॉलेज में भी आएं और उनके हाथों बच्चों को सनद (डिग्री) बंटवाई गई. उस वक़्त उनके द्वारा दी गई तक़रीर अब भी कॉलेज के पास महफ़ूज़ है. सितम्बर 1946 में अल्लामा सैय्यद सुलैमान नदवी ने बच्चों में डिग्री तक़सीम की. उस वक़्त उनके द्वारा दी गई तक़रीर भी महफ़ूज़ है.

कॉलेज की नई इमारत

यहां यह भी स्पष्ट रहे कि महेश नारायण की क़ुरबानी, डॉ. सिन्हा, सर अली ईमाम की दुरंदेशी, हसन ईमाम, मौलाना मज़हरुल हक़ की जद्दोजेहद और 22 साल की मेहनत की वजह से 22 मार्च 1912 को बिहार एक ख़ुद मुख़्तार रियासत बना. इसके बाद यहां कई तालीमी इदारे खुलें. लेकिन एक भी सरकारी मेडिकल कॉलेज वजूद में नहीं आया था. इसी दौरान हकीम अजमल ख़ान ने आयुर्वेद और यूनानी तिब्ब के बचाव के लिए तहरीक चला रहे थे. 1906 में उन्होंने ऑल इंडिया आयुर्वेदिक एंड यूनानी तिब्ब कांफ्रेंस कर अंग्रेज़ी हुकूमत को इस बात पर आमादा कर लिया कि वो आधुनिक चिकित्सा पद्धती के मुक़ाबले आयुर्वेद और युनानी चिकित्सा पद्धती को किसी भी हाल मे कमतर नहीं समझें.

मार्च 1915 में दरभंगा महराज की अध्यक्षता में एक जलसा ऑल इंडिया आयुर्वेदिक एंड यूनानी तिब्ब कांफ्रेंस के नाम पर होता है, जिसमें मौलाना आज़ाद, सर फ़ख़रूद्दीन, सर गणेश दत्त, मौलाना मज़हरुल हक़, हकीम इदरीस, हकीम रशीदुन्नबी, हकीम क़ुतुबउद्दीन, हकीम अब्दुल क़य्युम, पटना के विधायक मुबारक करीम, अहमद शरीफ़ (बार एैट लॉ) जैसे क़द्दावर लोग शरीक होते हैं और बिहार सरकार से आयुर्वेदिक और यूनानी स्कुल खोलने की मांग करते हैं. फिर इसके बाद शुरु होता है सरकारी मेडिकल कॉलेज के लिए जद्दोजहद. मौलाना मज़हरुल हक़ जो उस समय पटना के बड़े वकील थे, ने इस तहरीक में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और आर्थिक मदद की की. सर फ़ख़रूद्दीन और सर गणेश दत्त उस समय की सरकार में मंत्री थे, उन्होंने इस तहरीक का समर्थन किया. 10 साल की जद्दोजहद के बाद कामयाबी हाथ लगी और 1924 में कमिश्नर इस चीज़ पर राज़ी हो गया कि बिहार में ना सिर्फ़ मेडिकल स्कूल खुलेगा बल्कि उसके साथ ही साथ अलग-अलग आयुर्वेदिक और यूनानी स्कूल भी खोले जाएंगे. इसी के साथ अगले साल फ़रवरी 1925 में बिहार का पहला मेडिकल स्कूल वजूद में आया. टेंपल मेडिकल स्कुल, जो बाद में प्रिंस ऑफ़ वेल्स मेडिकल कॉलेज के नाम से मशहूर हुआ, जिसे आज दुनिया PMCH के नाम से जानती है. इसके एक साल बाद 6-8 मार्च 1926 को हुए ऑल इंडिया आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्ब कांफ्रेंस के चौदहवें इजलास में सरकार के काम की तारीफ़ की गई और उन पर ये दबाव डाला गया कि जल्द से जल्द आयुर्वेदिक और यूनानी स्कुल वजूद में लाया जाए.

उसी साल इस मुद्दे को लेकर एक कमिटी का गठन किया गया, जिसकी मीटिंग पटना डिविज़न के कमिश्नर हिकॉक की अध्यक्षता में कमिश्नर के ऑफ़िस में हुई. एस.एन. होदा (आई.सी.एस), हकीम मुहम्मद इदरीस, ख़ान बहादुर सैय्यद मुहम्मद इस्माईल, हकीम सैय्यद मज़ाहिर हसन, हकीम अब्दुल करीम इस कमिटी के संस्थापक सदस्य थे. वहीं एस.एम.शरीफ़ (बार एट लॉ) इसके सेक्रेट्री मेम्बर थे.


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Md Umar Ashraf

Md. Umar Ashraf is a Delhi based historian, who after pursuing a B.Tech (Civil Engineering) started heritagetimes.in to explore, and bring to the world, the less known historical accounts. Mr. Ashraf has been associated with the museums at Red Fort & National Library as a researcher. With a keen interest in Bihar and Muslim politics, Mr. Ashraf has brought out legacies of people like Hakim Kabeeruddin (in whose honour the government recently issued a stamp). Presently, he is pursuing a Masters from AJK Mass Communication Research Centre, JMI & manages heritagetimes.in.

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