Md Umar Ashraf

पटना के नेउरा गांव में पैदा हुए जस्टिस सैयद जाफ़र इमाम उन चुनिंदा बिहारी मुसलमानो में से एक थे जो 1946 में भारतीय संविधान सभा के सदस्य बनें।

पटना हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस रह चुके सैयद जाफ़र इमाम का जन्म 18 अप्रैल 1900 को पटना ज़िला के नेउरा गांव में हुआ। सैयद जाफ़र इमाम के वालिद का नाम सर अली इमाम था और उनके चाचा सैयद हसन ईमाम थे जो महान स्वातंत्रता सेनानी के साथ एक महान वकील भी थे। जहां अली इमाम ने 1908 में अमृतसर मे हुए मुस्लिम लीग के सालाना अधिवेशन की अध्यक्षता की वहीं हसन इमाम ने 1918 में बंबई में हुए कांग्रेस के स्पेशल अधिवेशन की अध्यक्षता की; अली इमाम ने 1920 में लीग ऑफ़ नेशन की पहली असेंबली में भारत की नुमाईंदगी की, वहीं 1923 में हसन इमाम ने लीग ऑफ़ नेशन की चौथी असेंबली में भारत की नुमाईंदगी करी!

अपने पिता और चाचा की तरह सैयद जाफ़र इमाम भी उच्च शिक्षा हासिल करने इंगलैंड गए। शुरुआती पढ़ाई आक्सफ़ोर्ड में की, फिर ट्रिनिटी कॉलेज कैम्ब्रिज में दाख़िला लिया और वहां से 1921 में बी.ए. और 1922 में एल.एल.बी की डिग्री हासिल की।  फिर 26 जनवरी 1922 को मिडिल टेंपल में शामिल हो गए।

1922 में सैयद जाफ़र इमाम बैरिस्टर बनकर वापस बिहार लौटे और 22 साल की उम्र में पटना हाईकोर्ट में वकालत की शुरुआत मार्च 1922 मे की, जहां वो क्रिमनल लॉयर के तौर पर मशहूर हुए। 32 साल के उम्र में उन्हे सहायक सरकारी वकील के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होने 1932 से 1939 तक अपनी सेवाएं दी। 1942 में उन्हे बिहार एैडवोकेट जेनेरल बना दिया गया, जहां वो 1943 तक इस पद पर रहे। 1943 में 43 साल की उम्र में पटना हाईकोर्ट के जस्टिस बने और 1953 तक वे इस पद पर रहे, इसी दौरान उन्होंने भारतीय संविधान सभा में बिहार का प्रतिनिधित्व किया, और एक क़ानूनदां की हैसियत से संविधान बनाने में अपना महत्वपुर्ण सुझाव दिया।

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फिर 3 सितम्बर 1953 को उन्हें पटना हाईकोर्ट का चीफ़ जस्टिस बना दिया गया, जहां इस पद पर वो 9 जनवरी 1955 तक रहे। ज्ञात रहे के सैयद जाफ़र इमाम पटना हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस बनने वाले चौथे भारतीय थे। 10 जनवरी 1955 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस बनाया गया जहां वो इस पद पर 31 जनवरी 1964 तक रहे। 1955 में मात्र 55 साल की उम्र में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बनने वाले वो पहले व्यक्ति थे। सुप्रीम कोर्ट के सबसे कम उम्र के जस्टिस के साथ वो उस समय हिन्दुस्तान के सबसे सिनीयर मुस्लिम जस्टिस थे। साथ ही वो 20वीं सदी में पैदा हुए पहले व्यक्ति थे जो सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बने।

सैयद जाफ़र इमाम चीफ़ जस्टिस बनने वाले थे पर उनकी तबियत बहुत ही ख़राब हो गई। आख़िर पंडित नेहरु, जिनसे उनके पुराने ख़ानदानी तालुक़ात रहे हैं के सुझाव पर 1964 में रिटायर होने के बाद सैयद जाफ़र इमाम पटना लौट आए, जहां वो जीवन भर बांकीपुर कलब पटना के सदस्य रहे और 30 नवम्बर 1965 को 65 साल की उम्र में इंतक़ाल कर गए।

बिमारी की वजह कर सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस नही बन पाने वाले सैयद जाफ़र इमाम की बड़ी बेटी की शादी मिर्ज़ा हमीदउल्ला बेग से हुई, जो सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के 15वें चीफ़ जस्टिस हुए, जो 29 जनवरी 1977 से 21 फ़रवरी 1978 तक इस पद पर रहे।