ध्रुव गुप्त

‘भारत कोकिला’ के नाम से विख्यात भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अप्रतिम योद्धा स्वर्गीया सरोजनी नायडू अपनी सांगठनिक क्षमता, ओजपूर्ण वाणी और देश की आज़ादी के लिए अपने प्रयासों की वज़ह से अपने दौर की सर्वाधिक लोकप्रिय महिला रही है।

वे आज़ादी से पूर्व कांग्रेस की प्रेसिडेंट भी रहीं और आज़ादी के बाद प्रदेश की राज्यपाल भी। बहुत कम लोगों को पता है कि सरोजनी नायडू अपने समय की विख्यात कवयित्री भी थीं जिनकी कविताओं के अनुवाद कई भाषाओं में हुए हैं।

1905 में प्रकाशित उनके कविता-संकलन ‘द गोल्डन थ्रेसहोल्ड’ ने सफ़लता और लोकप्रियता का कीर्तिमान स्थापित किया था। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि, मेरे द्वारा अनुदित उनकी एक प्यारी-सी कविता के साथ !

ओ मेरे प्यार
मूंद दो अथाह आनंद से थकी
और बुझी मेरी आंखों को
यहां रोशनी बहुत तेज है

खामोश कर दो
गीत गाते-गाते थक चुके
मेरे अधरों को
अपने एक गहरे चुंबन से

बारिश में भींगे
गीले फूल की तरह
वेदना और बोझ से झुकी
मेरी आत्मा को
कहां पनाह मिल पाएगा
अगर सामने तेरा चेहरा न हो !

लेखक पुर्व आईपीएस हैं।