ध्रुव गुप्त

भारतीय सिनेमा के महानतम फिल्मकारों में एक राज कपूर के बगैर भारतीय सिनेमा का इतिहास अधूरा है। वे महान अभिनेता ही नहीं, स्वप्नदर्शी निर्माता और निर्देशक भी थे। उन्हें भारतीय सिनेमा का पहला शोमैन कहा जाता है I दिलीप कुमार और देवानंद के साथ उनकी तिकड़ी ने हिंदी सिनेमा को नई पहचान, नई ऊंचाई और दुर्लभ ग्लैमर दिया था। हिंदी सिनेमा की पहली त्रिमूर्ति में जहां दिलीप कुमार प्रेम की गंभीरता के लिए और देव आनंद प्रेम की शरारतों के लिए जाने जाते थे, राज कपूर के हिस्से में प्रेम का भोलापन आया था।

वे ऐसे अभिनेता थे जो जीवन की कुरूपताओं और विसंगतियों को एक हंसते हुए बच्चे की मासूम निगाह से देख सकते थे। चार्ली चैप्लिन की सरलता और निश्छलता को भारतीय परिवेश में जीवंत करने की उनकी अदा को दर्शकों ने हाथोहाथ लिया।

1947 में अभिनेता के रूप में मधुबाला के साथ उनकी पहली फिल्म ‘नीलकमल’ आई थी। अगले साल उन्होंने अपनी एक टीम बनाकर आर के फिल्म्स की स्थापना कीI निदेशक-अभिनेता राज कपूर, लेखक खवाजा अहमद अब्बास,गीतकार शैलेन्द्र और हसरत जयपुरी, संगीतकार शंकर जयकिशन और छायाकार राधू करमाकर की जादुई टीम ने इस बैनर को आवारा, श्री 420, जागते रहो, बूट पालिश, संगम, जिस देश में गंगा बहती है और मेरा नाम जोकर जैसी कालजयी फ़िल्में दी।

उनके द्वारा अभिनीत दूसरी प्रमुख फ़िल्में हैं – आग, बरसात, अंदाज़, शारदा, बावरे नैन, सरगम, फिर सुबह होगी, परवरिश, चोरी चोरी, चार दिल चार राहें, कन्हैया, अनाड़ी, छलिया, दुल्हा दुल्हन, नज़राना, आशिक़, एक दिल और सौ अफसाने, श्रीमान सत्यवादी, दिल ही तो है, सपनों का सौदागर, दीवाना, तीसरी क़सम, कल आज और कल, गोपीचंद जासूस आदि। अपनी आरंभिक फिल्मों की नायिका नर्गिस के साथ उनका प्रेम सिनेमा इतिहास की दुखांत प्रेम कथाओं में एक माना जाता है। सिनेमा में उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान ‘दादासाहब फाल्के अवार्ड’ से नवाज़ा था। इस महान और स्वप्नदर्शी फिल्मकार-अभिनेता के जन्मदिन (14 दिसंबर) पर हार्दिक श्रधांजलि, एक शेर के साथ !

दुनिया पर हंसने का फन आसान नहीं
पहले अपनी हंसी उड़ानी होती है !
(ध्रुव गुप्त)

लेखक पुर्व आईपीएस हैं।