Shubhneet Kaushik

1949 के आरंभ में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को जापान से बच्चों के पत्र मिलने शुरू हुए। हज़ारों की तादाद में लिखे गए इन पत्रों में नेहरू से एक ही अनूठी गुजारिश की गई थी। इन बच्चों की एक भोली ख़्वाहिश थी कि भारत जापान को एक हाथी उपहार में दे। दरअसल, टोक्यो के चिड़ियाघर में मौजूद हाथी द्वितीय विश्वयुद्ध के अंतिम समय में मित्र राष्ट्रों द्वारा जापान पर की बमबारी में अनेक दूसरे जानवरों के साथ मारे जा चुके थे। और ये ख़त उसी सिलसिले में लिखे गए थे।

18 जून 1949 को विदेश सचिव को लिखे एक नोट में नेहरू ने लिखा कि ‘आपने जापानी बच्चों द्वारा भेजे गए उन पत्रों को देखा होगा, जिसमें उन बच्चों ने टोक्यो के चिड़ियाघर के लिए हाथी भेजने की बात कही है।’ नेहरू ने यह भी लिखा कि जापान के सलामंडर ब्रीडिंग एसोसिएशन के प्रमुख ने भी उन्हें ख़त लिखा है, जिसमें उन्होंने भारत से भेजे जाने वाले हाथियों के बदले में जायंट सलामंडर (सर्वाधिक लंबी आयु वाला उभयचर जीव) भेजने की बात कही थी। नेहरू ने कहा कि उन्हें मालूम नहीं है कि ये जायंट सलामंडर कैसे जीव होते हैं, सचिव अगर चाहें तो ख़ुद इस विषय में जीववैज्ञानिकों से पूछताछ कर सकते हैं।

नेहरू ने उसी ख़त में आगे जोड़ा कि अधिक जरूरी यह है कि हम जापान को हाथी भेज दें। मुख्य सवाल है हाथी को भेजने के साधन का। नेहरू ने विदेश सचिव से कहा कि वे जापानी प्रतिनिधियों से बात कर उन्हें जापानी बच्चों की मांग से अवगत करा दें, और यह भी बता दें कि हम जल्द ही हाथी भेजने की व्यवस्था करेंगे और इस संदर्भ में वे भी हमारी सहायता करें। आखिरकार, जापानी बच्चों की मांग को पूरा करते हुए गांधी जयंती से ठीक एक दिन पूर्व 1 अक्तूबर 1949 को हाथी का एक बच्चा जापान को भारत द्वारा भेंट दिया गया।

इस अवसर पर जापानी बच्चों को दिए गए संदेश में नेहरू ने कहा कि ‘यह हाथी हिंदुस्तान के बच्चों द्वारा जापान के बच्चों को दी गई भेंट हैं। अत्यंत शक्तिशाली होने के बावजूद भी हाथी बेहद समझदार, धैर्यवान और विनम्र जीव होता है। मैं उम्मीद करता हूँ कि जापानी बच्चे भी हाथी के इन गुणों से प्रेरणा लेंगे।’