जिगर मुरादाबादी :- कहते हैं, सबब रुस्वाई का होती है मैकशी, जिगर को मैकशी ने मगर मुम्ताज़ कर दिया।

  आलम क़ुरैशी जिगर मुरादाबादी, एक एैसे शायर, जिन्होंने हुस्न को टूटकर चाहा, जी जोड़ मुहब्बत की और जब ख़ुद टूटे, तो इलाजे ग़म के लिए शराब के क़तरों में भी पनाह लेने से गुरेज़ नहीं किया। और शायरी में जो कमाल किया, उसके तो क्या कहने, जिस मंच पर चढ़े, अपना करके ही उतरे। … Continue reading जिगर मुरादाबादी :- कहते हैं, सबब रुस्वाई का होती है मैकशी, जिगर को मैकशी ने मगर मुम्ताज़ कर दिया।