भारत की आज़ादी के बाद देश में जो हालात थे, उनसे तो आप सब बख़ूबी वाक़िफ़ होंगे. इस मुश्किल दौर में गाँधी जी 9 सितम्बर, 1947 की सुबह दिल्ली स्टेशन पहुंच कर पहला सवाल यही किया था – “ज़ाकिर हुसैन सकुशल हैं? क्या जामिया मिल्लिया इस्लामिया सुरक्षित है?” इतना ही नही, दूसरे ही दिन सुबह सुबह अपना भरोसा पक्का करने के लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया आए.

यह ख़बर के मुताबिक़ महात्मा गांधी जब ओखला में जामिया के शरणार्थी कैंप में आए तो यहां उन्हें ज़ाकिर हुसैन ने रिसीव किया. मुस्लिम शरणार्थियों ने महात्मा गांधी को बताया कि उनके गांवों में कैसे उनके साथ परेशानी शुरू हो गई थी. महात्मा गांधी ने डर को भगाने और साहसी होने के लिए बुर्का में मुस्लिम महिलाओं के एक समूह को समझाया. उन्हे एक नवजात बच्चा दिखाया गया, जिसके माता-पिता गुंडों द्वारा मार दिए गए थे. बता दें कि इस दिन जामिया के एक दरवाज़े में महात्मा गांधी की एक उंगली दबने के कारण थोड़ा सा कट गया था.

अफ़रोज़ आलम साहिल की किताब जामिया और गाँधी से