अगर आप से मैं यह कहुं कि आज से 400 साल पहले एक इन्सान हवा में उड़ते हुए योरप से एशिया पहुंच गया तो शायद आप मुझ पर यक़ीन ना करें लेकिन एक ऐसा शख्स था जिसने यह कर दिखाया , आपको यकीन नहीं होगा लेकिन यह सौ फीसदी सच है कि उन्होने ये उस वक़्त किया जब कोई उड़ने का तसव्वुर भी नही कर सकता था..

हेज़ारफ़ेन अहमद चलबी ख़िलाफ़त ए उस्मानीया का एक बेहतरीन Avaitor था. 1630 इ• मे इस शख़्स ने सुलतान मुराद IV के सामने ज़मीनी सतह से 97.59 m (320.18 ft) उंचे गेलाटा टावर से हांथ के बने हुए पंख की मदद से क़ुस्तुन्तुनिया (इंस्तानबुल) के योरप वाले इलाके Karaköy से क़ुस्तुन्तुनिया के एशिया के इलाक़े दोगन्सिलर चौराहा Üsküdar तक उड़ता हुआ जा पहुंचता है…

ये सफ़र 3.38 Km लम्बा था..

तुर्की के लेखक और इतिहासकार Evliyâ Çelebi ने इस बात को अपनी किताब में कुछ इस तरह लिखा है :- 1630–1632 के दौरान Hezârfen Ahmed Celebi ने 8-9 बार उड़ने की प्रे़ैकटिस बाज़ के पंख की मदद से की और फिर सुलतान मुराद हांन IV की मौजुदगी में वो गलाटा टावर से उड़ गया और हवा की मदद से दोगन्सिलर चौराहे पर जा कर उतरता है, सुलतान मुराद IV Hezarfen Ahmed Celebi को सोने की थैली इनाम देते हुए कहते हैं कि :- ये शख़्स बहुत ख़तरनाक है जो अपने मक़सद को पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है.. एैसे लोग को साथ ऩही रखा जा सकता है, और उसे मुल्क बदर कर अलजीरिया भेज दिया जाता है.

1638 में ब्रिटिश फ़िलास्फ़र John Wilkins द्वारा लिखी किताब “Discovery of a World in Moone” में भी Hezarfen Ahmed Celebi का ज़िक्र कुछ इस तरह मिलता है :- “a Turk in Constantinople” attempted to fly.

आज Istanbul में तीन एयरपोर्ट हैं जिनमे एक का नाम है “Hezarfen Airfield”.

Md Umar Ashraf