इस तस्वीर को पहचान लीजिये। यह वोह चेहरा है जो हमे सम्भालने के लिए कहीं छुप गया। हमारे ज़ख्मो पर मरहम रखता रखता गुम हो गया। हमे हमारे मतलब का चेहरा याद रह गया। इनसे सीखें की कैसे बिना तलवार उठाए,चीखें चिल्लाए बिना भी अपने अंदर छुपे हुनर से बड़ी से बड़ी सल्तनत को जवाब दिया जा सकता है। महसूस कीजिये कैसे किसी दर्द में डूबे दिल को मुस्कान की छाँव में लाया जा सकता है। जब ज़ुल्म इन्तेहा कर जाए तब यह एक रास्ता बनाते हैं। जब इंसानियत टुकड़ो टुकड़ों में बट जाए तब इनके जैसे किरदार खुद को मिटाकर टूटे दिलों को जज़्बात से जोड़ते हैं।

यहाँ तक हमे हमारे ग़म भुलाने के लिए इन्होंने जो चेहरा अपने खूबसूरत चेहरे पर ओढ़ लिया, मैं सोच कर हैरान हूँ की यह किस तक़लीफ़ से गुज़रे होंगे। उस चेहरे को अपनाना जिस चेहरे के विरुद्ध ही लड़ाई हो, बड़े जिगरे का काम है। जब आईने में अपनी सूरत देखते होंगे तो किस क़द्र दिल रोता होगा, मगर हर आँसू की ज़ब्त करके वह हमारे डूबे हुए दिलों को पार लगाते हैं।

सबसे बड़ी बात तब और अब में उस वक़्त उनका जो दुश्मन था उसके मुकाबले का खूँखार आज कोई भी नही है मगर आज मैं अपने विरोधी का चेहरा तो छोड़िये नाम लेकर भी मज़ाक कर दूँ तो टुकड़े टुकड़े कर दिया जाऊँ। कल जब वह मज़ाक करता था तो जनता उनमे अपने दर्द देखती थी आज दुनिया के किसी भी कोने में नेता का विरोध कीजिये तो आपके साथ कम लोग ही होंगे। हाँ अगर कुछ दिमागी पिछड़े हुए देश में आपने उनके नेताओं की अक्षमता,क्रूरता,धूर्तता पर सवाल किये तो कहिये भीड़ आपको खींचकर ही मार डाले। पकड़ कर सलाखों में डाल दिया जाए।

आज 16 अप्रैल को अपने चार्ली चेपलिन को याद कर लीजिये। मेरे तो इर्द गिर्द वही हैं। आज चार्ली का जन्मदिन है, हो सके तो उनके उन किस्सों को याद कीजिये जिसमे वोह युद्ध के विरुद्ध या युद्ध में लोगों को मायूस न होने के रास्ते बुन रहे थे। आज एक बार फिर दुनियाभर में गुस्से और बदले की आग से भरे हुए लोग उभर आए हैं, आज फिर चार्ली बेहद अहम् हो गए हैं। चार्ली के विरोध का तरीका भी जानना,बताना और पढ़ाना चाहिए..

हफ़ीज़ किदवई