11 अगस्त 1942 को आज ही के दिन बिहार के सात सपूत अंग्रेजों द्वारा गोली मारे जाने से शहीद हो गए थे।

ये सभी छात्र थे और 1942 में अगस्त क्रांति के दौरान 11 अगस्त को दो बजे दिन में पटना के सचिवालय पर झंडा फहराने निकले थे। पटना के उस समय के जिलाधिकारी डब्ल्यू जी आर्थर के आदेश पर पुलिस ने गोलियां चलाई थीं। इसमें लगभग 13 से 14 राउंड गोलियों की बौछार हुई थी। ये सात सपूत थे उमाकांत प्रसाद सिंह, रामानंद सिंह, सतीश प्रसाद झा, जगपति कुमार, देवीपद चौधरी, राजेन्द्र सिंह और राम गोविंद सिंह।

इस अभियान का नेतृत्व कर रहे थे देवीपद चौधरी। देवी पद चौधरी की उम्र 14 साल की थी। वे सिलहट (वर्तमान में बांग्लादेश) के जमालपुर गांव के रहने वाले थे। वे जब सचिवालय की ओर अपने छह साथियों के साथ बढ़ रहे थे तो पुलिस ने उन्हें रोकना चाहा पर वे रुकने वाले कहां थे। देवीपद तिरंगा थामे आगे बढ़ रहे थे कि पुलस ने उन्हें गोली मार दी। देवीपद को गिरते देख पटना जिले के दशरथा गांव के रामगोविंद सिंह आगे बढ़े और हाथ में तिरंगा ले लिया। देवकी सिंह के पुत्र रामगोविंद सिंह उस समय पुनपुन के हाईस्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ रहे थे।

रामगोविंद सिंह आगे बढ़े पुलिस ने उन्हें भी गोली मारी दी। तिरंगा रामानंद सिन्हा ने थामा और उसे गिरने नहीं दिया। पटना जिले के रहने वाले रामानंद सिंह 10वीं कक्षा के छात्र थे। उनकी शादी हो चुकी थी। रामानंद को गिरता देख सारण जिले के दिघवारा के निवासी राजेन्द्र सिंह ने तिरंगा थामा। राजेन्द्र सिंह आगे बढ़े। गर्दनीबाग उच्च विद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे। उनका भी विवाह हो चुका था। राजेन्द्र सिंह के पिता का शिवनारायण सिंह थे। राजेन्द्र सिंह से तिरंगे को गिरता देख जगपति कुमार ने संभाला। जगपति कुमार औरंगाबाद जिले के रहने वाले थे।

जगपति कुमार को एक गोली हाथ में लगी दूसरी गोली छाती मे धंसी और तीसरी गोली जांघ में लगी फिर भी तिरंगा नहीं झुका। अब आगे आये भागलपुर जिले (बांका) के बरापुरा ग्राम के श्री मथुरा प्रसाद का सुपुत्र सतीश झा। वे पटना कालेज में पढ़ते थे। तिरंगा फहराने की कोशिश में इन्हें भी गोली मार दी गई। सतीश भी शहीद हो गए पर झण्डा नहीं गिरने दिया।

उसे आगे बढ़कर उठा लिया उमाकान्त सिंह ने जो मात्र 15 वर्ष के थे। वे पटना के बी.एन.काॅलेज के द्वितीय वर्ष के छात्र थे। पुलिस दल ने उन्हें भी गोली का निशाना बनाया, पर उन्होंने गोली लगने पर भी आखिरकार सचिवालय के गुम्बद पर तिरंगा फहरा ही दिया। इसके बाद वे शहीद हो गए। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद इस स्थान पर शहीद स्मारक का निर्माण हुआ। इसका शिलान्यास स्वतन्त्रता दिवस को बिहार के प्रथम राज्यपाल जयराम दौलत राय के हाथों हुआ। औपचारिक अनावरण देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 1956 में किया।

शहीद सात महान बिहारी सपूत-
1. उमाकान्त प्रसाद सिंह- राम मोहन राय सेमीनरी स्कूल के 12 वीं कक्षा के छात्र थे। इनके पिता राजकुमार सिंह थे। वह सारण जिले के नरेन्द्रपुर ग्राम के निवासी थे।
2 रामानन्द सिंह- ये राम मोहन राय सेमीनरी स्कूल पटना के 11 वीं कक्षा के छात्र थे। इनका जन्म पटना जिले के ग्राम शहादत नगर में हुआ था। इनके पिता लक्ष्मण सिंह थे ।
3. सतीश प्रसाद झा-सतीश प्रसाद का जन्म भागलपुर जिले के खडहरा में हुआ था। इनके पिता जगदीश प्रसाद झा थे। वह पटना कालेजियत स्कूल के 11वीं कक्षा के छात्र थे।
4. जगपति कुमार- इस महान सपूत का जन्म गया जिले (वर्तमान में औरंगाबाद) के खराठी गांव में हुआ था।
5. देवीपद चौधरी- इस महान सपूत का जन्म सिलहर जिले के अन्तर्गत जमालपुर गांव में हुआ था। वे मीलर हाईस्कूल के 9वीं कक्षा के छात्र थे।
6. राजेन्द्र सिंह- इस महान सपूत का जन्म सारण जिले के बनवारी चक ग्राम में हुआ था। वह पटना हाईस्कूल के 11वीं के छात्र थे।
7. राय गोविन्द सिंह- इस महान सपूत का जन्म पटना जिले के दशरथ ग्राम में हुआ। वह पुनपुन हाईस्कूल में 11वीं के छात्र थे।