संत रैदास को याद करते हुए

Shubhneet Kaushik रैदास कबीर और नामदेव की परंपरा के कवि हैं। वह परंपरा जिसमें सेन, पीपा, धन्ना आदि भी आते हैं। जिनमें कोई दरजी है, तो कोई जुलाहा, तो कोई नाई। ख़ुद रैदास चमार जाति के : ‘कहै रैदास खलास चमारा’। पर सभी का विश्वास मानवता में, मानव-धर्म की सार्वभौमिकता और सार्वकालिकता में। रैदास मनुष्यमात्र … Continue reading संत रैदास को याद करते हुए