दुनिया में बहुत सारे कैलेंडर, लगभग हर क़ौम और हर बड़े मज़हब का अपना अपना कैलेंडर है, मुसलमानों का अपना कैलेंडर है जिसे हिजरी कैलेंडर कहते है, हिन्दुओं का अपना कैलेंडर है जिसे विक्रम कैलेंडर कहते हैं, लेकिन न हिन्दुओं ने और न ही मुसलमानों ने अपने कैलन्डर के वजूद को बरक़रार रखा है।

इसकी शायद बड़ी वजह ये है कि ये दोनों क़ौम पहले अंग्रेज़ो की ग़ुलाम रह चुकी है और आज भी दिमाग़ी तौर पर अंग्रेज़ी सभ्यता की ग़ुलाम है।

अंग्रेज़ी कैलेंडर शुरुआत से लेकर आज तक गलतीयों से भरा पड़ा है मगर कहते हैं जिनके हाथ में सोंटा हो चलती उन्ही की है, अंग्रेज़ी कैलेंडर की सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी ये है कि इसे हज़रत ईसा (अ.स.) की तरफ़ मंसूब किया जाता है, हज़रत ईसा (अ.स.) की सही पैदाईश का इल्म किसी को नहीं है। ये गुमान किया जाता है की हज़रत ईसा (अ.स.) की पैदाश 753 रोमी साल में हुई थी। (रोमी कैलेंडर शहर रोम के बुनियाद के रिवायती साल से शुरू होता है इसे AUC यानी ab urbe Condita से denote करते हैं , इस रोमी साल में 12 महीने थे जो 29 या 30 दिन के होते थे, हर साल रोमी कैलेंडर में दिनों का इज़ाफ़ा कर दिया जाता जिससे ज़मीन के सूरज के गिर्द चक्कर लगाने और रोमी कैलेंडर में अक्सानियत बरक़रार रखा जाता था, लेकिन सरकारी अफ़सरों की ग़लती की वजह से जुलियस सीज़र के वक़्त में सूरज और सरकारी साल में दो तीन महीने का फ़र्क़ आ गया। जुलियस सीज़र ने इस फ़र्क को दूर करने के लिए रोमी कैलेंडर में इस्लाह की और ये इस्लाह 759 AUC में हुई थी, इसे पहला यूलियन साल पुकारा गया।

ये रोमी कैलेंडर छठी सदी ईसवी तक चलता रहा, 525 इसवी में Dionysius Exiquus नाम के एक राहिब ने ये ख़्याल ज़ाहिर किया कि रोमी कैलन्डर की जगह ईसवी कैलेंडर की शुरुआत की जाए और उसने ईसवी कैलेंडर की बुनियाद रखी, और धीरे धीरे ये कैलेंडर मक़बूल होता चला गया।

हम सब जानते हैं की साल 365 दिन का होता है, मतलब ज़मीन सूरज के गिर्द एक चक्कर 365 दिन में पुरे कर लेता है, लोगों को पता चल जाता है फ़रवरी में कौन सा मौसम रहता है और साल का सबसे बड़ा दिन 21 जून को होता है वग़ैरह वग़ैरह।

लेकिन जब कैलेंडर के दस साल गुज़रे तो मालूम हुआ गड़बड़ी हो गयी है, साल का सबसे बड़ा दिन 21 जून नही रहा और साथ ही 21 दिसंबर भी साल का सबसे छोटा दिन नही रहा, गर्मी सर्दी भी अपनी जगह से हल्का सा खिसक गया।

कैलैंडर बे एैतबार हो गया, एक बार फिर दिनों की गिनती की जाने लगी, जूलियस सीज़र के टाइम में पता किया गया की साल 365 दिन का नही बल्के हर चोथे साल एक दिन बढ़ जाता है और उसे लीप इयर कहा गया।

इस तरह मसले का हल हो गया, 10 साल बाद चेक किया गया तो दिन वैसे के वैसे ही थे लेकिन एक सौ साल गुज़रा तो फिर गड़बड़ी हुई एक बार फिर 21 जून साल का सबसे बड़ा दिन नही रहा फिर जब पन्द्रह सौ साल गुज़रे तो गड़बड़ी काफ़ी बढ़ गयी, पन्द्रह दिन का कैलेंडर में फ़र्क आ गया।

एक बार फिर सर जोड़ कर बैठा गया उस जमाने GREGORY नाम के पोप थे, उन्होंने सारे सयाने को इस काम में लगा दिया, उस ज़माने में घड़ी आ चुकी थी हिसाब लगाया गया तो एक साल में 365 दिन 5 घंटे 40 मिनट 24 सेकंड 46 डिग्री निकला, लीप ईयर भी एक दिन नही बढ़ा बल्के एक दिन 11 मिनट 14 सेकंड का हो गया।

मसला हल हो गया, गड़बड़ मालूम हो गया लेकिन जुलियन कैलेंडर में 15 दिन ज्यादा हो गये थे, पोप साहब ने 15 दिन कम करके अपना कैलन्डर पेश कर दिया, लेकिन पुरानी तारीख़ गड़बड़ाने लगी, यूरोप में रोला मच गया पोप साहब की बात सही थी लेकिन अपनी तारिख़ को अपने हाथ बदले कौन ?

आधा यूरोप जुलियन कैलंडर से आधा ग्रेगोरी कैलेंडर से चलने लगा और आख़िरकार 1930 ईसवी में ग्रेगोरी कैलेंडर को तस्लीम कर लिया गया और 15 दिन के फ्रॉड को भी।